Monday, March 30, 2020

美大选两党持续角逐 民调:拜登支持率领先特朗普9%

  中新网3月30日电 据美国中文网报道肺炎疫情在全球扩散色情性&肛交集合,就在多国对口罩、色情性&肛交集合呼吸机等物资的需求直线上升之时,色情性&肛交集合中国已经着手进行大色情性&肛交集合规模对外援助。

中国国际发展合作色情性&肛交集合署副署长邓波清在3色情性&肛交集合月26日的新色情性&肛交集合闻发布会上说,色情性&肛交集合“此次对外抗疫援助是新中国成立以来,援助时间最集中,色情性&肛交集合涉及范围最广的一色情性&肛交集合次紧急人道主义行动。”

中国目前已经是色情性&肛交集合医用口罩的主要生产国家色情性&肛交集合,这在某种程度上得益于全球化的红利。而且经过抗疫期间的举国动员色情性&肛交集合,医用口罩的产量已经提高了十倍以上。今年3月,中国生产的N95口罩日色情性&肛交集合产能达到195万只。色情性&肛交集合当本国疫情缓和色情性&肛交集合,如何利用这些物资成了当局色情性&肛交集合最新的考虑。

官方强调,许多国家感谢中方“千里驰援色情性&肛交集合,雪中送炭”。不过似乎已经淡忘了,在疫情爆发初期因隐瞒疫情、打压“吹哨人”的行为,色情性&肛交集合令本国国民尤其是湖北居民陷入火坑,色情性&肛交集合也被质疑点燃了病毒在全球蔓延的火种。,近日,美国福克斯新闻发布最新民意调查显示,2020年大选民肺炎疫情在全球扩散色情性&肛交集合,就在多国对口罩、色情性&肛交集合呼吸机等物资的需求直线上升之时,色情性&肛交集合中国已经着手进行大色情性&肛交集合规模对外援助。

中国国际发展合作色情性&肛交集合署副署长邓波清在3色情性&肛交集合月26日的新色情性&肛交集合闻发布会上说,色情性&肛交集合“此次对外抗疫援助是新中国成立以来,援助时间最集中,色情性&肛交集合涉及范围最广的一色情性&肛交集合次紧急人道主义行动。”

中国目前已经是色情性&肛交集合医用口罩的主要生产国家色情性&肛交集合,这在某种程度上得益于全球化的红利。而且经过抗疫期间的举国动员色情性&肛交集合,医用口罩的产量已经提高了十倍以上。今年3月,中国生产的N95口罩日色情性&肛交集合产能达到195万只。色情性&肛交集合当本国疫情缓和色情性&肛交集合,如何利用这些物资成了当局色情性&肛交集合最新的考虑。

官方强调,许多国家感谢中方“千里驰援色情性&肛交集合,雪中送炭”。不过似乎已经淡忘了,在疫情爆发初期因隐瞒疫情、打压“吹哨人”的行为,色情性&肛交集合令本国国民尤其是湖北居民陷入火坑,色情性&肛交集合也被质疑点燃了病毒在全球蔓延的火种。主党参选人、前副总统拜登以9%的优势,领先共和党籍的现任总肺炎疫情在全球扩散色情性&肛交集合,就在多国对口罩、色情性&肛交集合呼吸机等物资的需求直线上升之时,色情性&肛交集合中国已经着手进行大色情性&肛交集合规模对外援助。

中国国际发展合作色情性&肛交集合署副署长邓波清在3色情性&肛交集合月26日的新色情性&肛交集合闻发布会上说,色情性&肛交集合“此次对外抗疫援助是新中国成立以来,援助时间最集中,色情性&肛交集合涉及范围最广的一色情性&肛交集合次紧急人道主义行动。”

中国目前已经是色情性&肛交集合医用口罩的主要生产国家色情性&肛交集合,这在某种程度上得益于全球化的红利。而且经过抗疫期间的举国动员色情性&肛交集合,医用口罩的产量已经提高了十倍以上。今年3月,中国生产的N95口罩日色情性&肛交集合产能达到195万只。色情性&肛交集合当本国疫情缓和色情性&肛交集合,如何利用这些物资成了当局色情性&肛交集合最新的考虑。

官方强调,许多国家感谢中方“千里驰援色情性&肛交集合,雪中送炭”。不过似乎已经淡忘了,在疫情爆发初期因隐瞒疫情、打压“吹哨人”的行为,色情性&肛交集合令本国国民尤其是湖北居民陷入火坑,色情性&肛交集合也被质疑点燃了病毒在全球蔓延的火种。统特朗普。
  根据民调数字,特朗普有40%的支持率,而拜登则有49%的支持率。另有11%的人表示,他们尚未决定或将投票给其他参选人。肺炎疫情在全球扩散色情性&肛交集合,就在多国对口罩、色情性&肛交集合呼吸机等物资的需求直线上升之时,色情性&肛交集合中国已经着手进行大色情性&肛交集合规模对外援助。

中国国际发展合作色情性&肛交集合署副署长邓波清在3色情性&肛交集合月26日的新色情性&肛交集合闻发布会上说,色情性&肛交集合“此次对外抗疫援助是新中国成立以来,援助时间最集中,色情性&肛交集合涉及范围最广的一色情性&肛交集合次紧急人道主义行动。”

中国目前已经是色情性&肛交集合医用口罩的主要生产国家色情性&肛交集合,这在某种程度上得益于全球化的红利。而且经过抗疫期间的举国动员色情性&肛交集合,医用口罩的产量已经提高了十倍以上。今年3月,中国生产的N95口罩日色情性&肛交集合产能达到195万只。色情性&肛交集合当本国疫情缓和色情性&肛交集合,如何利用这些物资成了当局色情性&肛交集合最新的考虑。

官方强调,许多国家感谢中方“千里驰援色情性&肛交集合,雪中送炭”。不过似乎已经淡忘了,在疫情爆发初期因隐瞒疫情、打压“吹哨人”的行为,色情性&肛交集合令本国国民尤其是湖北居民陷入火坑,色情性&肛交集合也被质疑点燃了病毒在全球蔓延的火种。在2月的民调中,拜登领先特朗普8%,双方的支持度为49%比41%。
  与此同时,在那些“对选举极为感兴趣”的选民中,肺炎疫情在全球扩散色情性&肛交集合,就在多国对口罩、色情性&肛交集合呼吸机等物资的需求直线上升之时,色情性&肛交集合中国已经着手进行大色情性&肛交集合规模对外援助。

中国国际发展合作色情性&肛交集合署副署长邓波清在3色情性&肛交集合月26日的新色情性&肛交集合闻发布会上说,色情性&肛交集合“此次对外抗疫援助是新中国成立以来,援助时间最集中,色情性&肛交集合涉及范围最广的一色情性&肛交集合次紧急人道主义行动。”

中国目前已经是色情性&肛交集合医用口罩的主要生产国家色情性&肛交集合,这在某种程度上得益于全球化的红利。而且经过抗疫期间的举国动员色情性&肛交集合,医用口罩的产量已经提高了十倍以上。今年3月,中国生产的N95口罩日色情性&肛交集合产能达到195万只。色情性&肛交集合当本国疫情缓和色情性&肛交集合,如何利用这些物资成了当局色情性&肛交集合最新的考虑。

官方强调,许多国家感谢中方“千里驰援色情性&肛交集合,雪中送炭”。不过似乎已经淡忘了,在疫情爆发初期因隐瞒疫情、打压“吹哨人”的行为,色情性&肛交集合令本国国民尤其是湖北居民陷入火坑,色情性&肛交集合也被质疑点燃了病毒在全球蔓延的火种。拜登也以52%比43%领先特朗普。此外,拜登在摇摆州也拥有8%的优势,他与特朗普的支持率分别为48%和40%。
  此外,在前国务卿希拉里和特朗普在2016年大选时,肺炎疫情在全球扩散色情性&肛交集合,就在多国对口罩、色情性&肛交集合呼吸机等物资的需求直线上升之时,色情性&肛交集合中国已经着手进行大色情性&肛交集合规模对外援助。

中国国际发展合作色情性&肛交集合署副署长邓波清在3色情性&肛交集合月26日的新色情性&肛交集合闻发布会上说,色情性&肛交集合“此次对外抗疫援助是新中国成立以来,援助时间最集中,色情性&肛交集合涉及范围最广的一色情性&肛交集合次紧急人道主义行动。”

中国目前已经是色情性&肛交集合医用口罩的主要生产国家色情性&肛交集合,这在某种程度上得益于全球化的红利。而且经过抗疫期间的举国动员色情性&肛交集合,医用口罩的产量已经提高了十倍以上。今年3月,中国生产的N95口罩日色情性&肛交集合产能达到195万只。色情性&肛交集合当本国疫情缓和色情性&肛交集合,如何利用这些物资成了当局色情性&肛交集合最新的考虑。

官方强调,许多国家感谢中方“千里驰援色情性&肛交集合,雪中送炭”。不过似乎已经淡忘了,在疫情爆发初期因隐瞒疫情、打压“吹哨人”的行为,色情性&肛交集合令本国国民尤其是湖北居民陷入火坑,色情性&肛交集合也被质疑点燃了病毒在全球蔓延的火种。票数相差在10%以内的地方中,拜登拥有25%的优势,他与特朗普的支持率分别为57%和32%。
  据悉,福克斯新闻在3月21日至24日之间,对101肺炎疫情在全球扩散色情性&肛交集合,就在多国对口罩、色情性&肛交集合呼吸机等物资的需求直线上升之时,色情性&肛交集合中国已经着手进行大色情性&肛交集合规模对外援助。

中国国际发展合作色情性&肛交集合署副署长邓波清在3色情性&肛交集合月26日的新色情性&肛交集合闻发布会上说,色情性&肛交集合“此次对外抗疫援助是新中国成立以来,援助时间最集中,色情性&肛交集合涉及范围最广的一色情性&肛交集合次紧急人道主义行动。”

中国目前已经是色情性&肛交集合医用口罩的主要生产国家色情性&肛交集合,这在某种程度上得益于全球化的红利。而且经过抗疫期间的举国动员色情性&肛交集合,医用口罩的产量已经提高了十倍以上。今年3月,中国生产的N95口罩日色情性&肛交集合产能达到195万只。色情性&肛交集合当本国疫情缓和色情性&肛交集合,如何利用这些物资成了当局色情性&肛交集合最新的考虑。

官方强调,许多国家感谢中方“千里驰援色情性&肛交集合,雪中送炭”。不过似乎已经淡忘了,在疫情爆发初期因隐瞒疫情、打压“吹哨人”的行为,色情性&肛交集合令本国国民尤其是湖北居民陷入火坑,色情性&肛交集合也被质疑点燃了病毒在全球蔓延的火种。1位随机选择的注册选民进行了民意调查,其误差幅度为3个百分点。

Friday, March 6, 2020

क्या भारत में औरतों को मर्दों के बराबर अधिकार हैं?

मर्द ही नहीं, भारत में औरतें भी मानती हैं कि उन्हें बराबर अधिकार हासिल हैं.पोर्न सेक्स और गुदा सेक्स संग्रह

बीबीसी ने देश के 14 राज्यों में 10,000 से ज़्यादा लोगों से जब ये सवाल पूछा तो 91 फ़ीसदी ने 'हां' में जवाब दिया.पोर्न सेक्स और गुदा सेक्स संग्रह

शोध में हिस्सा लेनेवाले लोगों में से दो-तिहाई का मानना है कि पिछले दो दशक में बराबरी बढ़ी है और बड़ी संख्या में लोगों के मुताबिक़ औरतों की ज़िंदगी अब मर्दों जितनी ही अच्छी है.पोर्न सेक्स और गुदा सेक्स संग्रह

ग्रामीण और कम समृद्ध लोगों के मुताबिक तो औरतों की ज़िंदगी अब मर्दों से बेहतर हो गई है.पोर्न सेक्स और गुदा सेक्स संग्रह

ऐसा लगता है कि सभी लोग सैद्धांतिक तौर पर समान हकों के पक्ष में हैं और ऐसा महसूस करते हैं कि भारत में औरतों के लिए बहुत अच्छा समय है. पर क्या ऐसा हुआ है?पोर्न सेक्स और गुदा सेक्स संग्रह

समानता की ये छवि बनने के पीछे कई वजहें हैं.

हाल में #MeToo जैसे आंदोलन जिसने ऊंचे पदों और ताकत के दुरुपयोग को चुनौती दी और ये ज़ाहिर किया कि यौन उत्पीड़न कितना व्यापक है.पोर्न सेक्स और गुदा सेक्स संग्रह

पिछले कुछ दशक में महिला आंदोलनकारियों और नौजवानों ने सरकारों को बेहतर क़ानून लाने पर मजबूर किया है.पोर्न सेक्स और गुदा सेक्स संग्रह

जैसे निजी ज़िंदगी से जुड़े क़ानून जैसे पैतृक संपत्ति में हक़, तलाक़, गोद लेने इत्यादि से लेकर क्रिमिनल लॉ जिसमें यौन हिंसा को बेहतर तरीके से परिभाषित किया गया है और न्याय प्रक्रिया की रफ़्तार तेज़ करने की कोशिश की गई है.पोर्न सेक्स और गुदा सेक्स संग्रह

इन कोशिशों के बावजूद, औरतों की ज़िंदगी के अनुभव बताते हैं कि उन्हें मर्दों जैसे अधिकार नहीं हासिल हैं.पोर्न सेक्स और गुदा सेक्स संग्रह

बीबीसी के शोध में पूछे गए सवालों के जवाबों से इस विरोधाभास की परतें खुलती हैं.पोर्न सेक्स और गुदा सेक्स संग्रह

भारत में लगातार गिरता बच्चों का लिंगानुपात ये ज़ाहिर करता है कि अब भी लड़कियों के मुकाबले लड़के की चाहत प्रबल है. साल 2011 के आंकड़ों के मुताबिक ये लिंगानुपात आज़ादी के बाद अपने सबसे कम स्तर पर आ गया है.पोर्न सेक्स और गुदा सेक्स संग्रह

हमारी अदालतों पर काम का दबाव ज़्यादा है और क़ानून में बलात्कार के मामलों को फ़ास्ट-ट्राक अदालतों में चलाए जाने के प्रावधान के बावजूद सुनवाई तयशुदा व़क्त में पूरी नहीं होती है.पोर्न सेक्स और गुदा सेक्स संग्रह

यौन उत्पीड़न के मामलों को साबित करना बहुत मुश्किल है और औरतों को इनकी सुनवाई के अलावा जवाब में किए गए मानहानि के मुकदमों से भी जूझना पड़ता है.पोर्न सेक्स और गुदा सेक्स संग्रह

गर्भावस्था के दौरान ज़रूरी सुरक्षित स्वास्थ्य सेवाओं की अब भी कमी है. यूनीसेफ़ (UNICEF) के मुताबिक दुनियाभर में रोज़ 800 औरतों की गर्भावस्था से ज़ुड़ी ऐसी बीमारियों से मौत होती हैं जो बेहतर सुविधाओं से रोकी जा सकती थीं. इनमें से 20 फ़ीसदी औरतें भारत से हैं.पोर्न सेक्स और गुदा सेक्स संग्रह

वर्ल्ड बैंक के ताज़ा आंकड़ों के मुतबिक भारत में 15 साल से ज़्यादा की उम्र की औरतों में से सिर्फ़ एक-तिहाई ही कामकाजी हैं. ये दुनियाभर में कामकाजी औरतों की सबसे कम दरों में से है.पोर्न सेक्स और गुदा सेक्स संग्रह

बीबीसी के शोध में पूछे गए सवालों के जवाबों से ये साफ़ होता गया कि समान अधिकारों की चाहत तो है पर व्यावहारिक तौर पर उसका मतलब क्या है उसकी समझ नहीं है.पोर्न सेक्स और गुदा सेक्स संग्रह

तीन-चौथाई से ज़्यादा लोगों ने ये माना कि औरतें अगर चाहें या उन्हें ज़रूरत हो तो उन्हें घर के बाहर काम करना चाहिए पर एक-तिहाई मानते हैं कि शादी के बाद औरतों का काम करना ठीक नहीं है.पोर्न सेक्स और गुदा सेक्स संग्रह

शोध में पता चलता है कि औरतों के लिए बेहतर माने जानेवाले राज्य, जैसे तमिल नाडु, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना और मिज़ोरम में कामकाजी औरतों की दर ज़्यादा है, बिहार, उत्तर प्रदेश और गुजरात में काफ़ी कम.पोर्न सेक्स और गुदा सेक्स संग्रह

सभी लोगों के जवाब देखें तो एक बहुत छोटी दर ही मानती है कि औरतें अपनी ख़्वाहिश से काम करती हैं. ज़्यादातर मानते हैं कि वो घर में पैसों की किल्लत को पूरा करने के लिए नौकरी करती हैं.पोर्न सेक्स और गुदा सेक्स संग्रह

ज़्यादातर ये भी मानते हैं कि औरत की जगह घर के अंदर होती है. क्योंकि वो घर से बाहर निकलें तो घक के काम पर बुरा असर पड़ता है और सुरक्षा के लिहाज़ से चिंताएं बढ़ती हैं.पोर्न सेक्स और गुदा सेक्स संग्रह

अगर नौकरियां कम हों, तो लोगों का मानना है कि मर्दों को पहला मौका देना चाहिए. महिलाएं तक ऐसा मानती हैं. जिससे ये ज़ाहिर होता है कि औरतों को घरेलू भूमिका में देखनेवाली सोच कितनी गहरी है.पोर्न सेक्स और गुदा सेक्स संग्रह

लड़कियों के मुकाबले लड़के की चाहत से शोध में लोग इनकार करते हैं पर एक बड़ा तबका मानता है कि युनिवर्सिटी के स्तर पर शिक्षा पाने का हक़ लड़कियों से ज़्यादा लड़कों का है.पोर्न सेक्स और गुदा सेक्स संग्रह

मणिपुर, जहां स्त्रियों को परिवार में प्रधान मानने का प्रचलन है, वहां के ज़्यादातर लोगों ने कहा कि उच्च शिक्षा पाने का हक़ बराबरी से मिलना चाहिए.पोर्न सेक्स और गुदा सेक्स संग्रह

शोध में सबसे परेशान करने वाली राय औरतों के ख़िलाफ़ हिंसा से जुड़ी है. अधिकांश लोगों ये मानते हैं कि यौन हिंसा बढ़ी है (जो तथ्य है) पर ये भी कहते हैं कि औरतों को परिवार को साथ रखने के लिए हिंसा बर्दाश्त करनी चाहिए.पोर्न सेक्स और गुदा सेक्स संग्रह

शोध ये इशारा करता है कि भारत में औरतों के अधिकारों को समझने के तरीके में बदलाव आ रहा है.पोर्न सेक्स और गुदा सेक्स संग्रह

औरतें परिवार और घर के बाहर अपनी भूमिका के दायरे बढ़ा रही हैं. पर उनकी ज़िंदगियों पर उनका इख़्तियार बढ़े उसके लिए दूसरों का नियंत्रण कम करना होगा.पोर्न सेक्स और गुदा सेक्स संग्रह

अधिकारों का यही लेन-देन समझना मुश्किल है और इसीलिए ज़िंदगी में इसका अमल धीमा. पर अगर समझने की कोशिश हो और रूढ़िवादी सोच को बदलने की चाहत, तो बदलाव आख़िरकार ज़रूर आएगा. पोर्न सेक्स और गुदा सेक्स संग्रह

Tuesday, January 28, 2020

क्या व्लादीमिर पुतिन रूस का पर्याय बन चुके हैं?

रूस में बीस साल की अपनी सत्ता के दौरान व्लादिमीर पुतिन ने अपनी ताक़त का कुछ ऐसा ताना-बाना बुना है कि देश की सत्ता सिर्फ़ उन्हीं के इर्द-गिर्द घूमती नज़र आती है.

इसका एक बड़ा उदाहरण उनके उस प्रस्ताव के रूप में भी देखा जा सकता है जिसके बाद रूस के प्रधानमंत्री दिमित्रि मेदवेदेव और उनकी पूरी कैबिनेट ने इस्तीफ़ा दे दिया.

रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने देश में व्यापक संवैधानिक सुधारों का प्रस्ताव रखा है.

इन प्रस्तावित सुधारों के लागू होने के बाद सिर्फ़ संविधान के सभी अनुच्छेद ही नहीं बदलेंगे बल्कि सत्ता संतुलन और ताक़त में भी बदलाव आएगा.

राष्ट्रपति पुतिन ने जो संवैधानिक प्रस्ताव रखे हैं, उस पर जनमत-संग्रह कराया जाएगा. इसके ज़रिए सत्ता की ताक़त राष्ट्रपति के बजाय संसद के पास ज़्यादा होगी. लेकिन यही वो बात है जिसके आधार पर कयास लगाए जा रहे हैं कि संवैधानिक बदलाव के प्रस्ताव के पीछे पुतिन की सोची-समझी रणनीति है.

जानकार मानते हैं कि वो आगे भी सत्ता के केंद्र में बने रहना चाहते हैं जबकि बतौर राष्ट्रपति उनका कार्यकाल साल 2024 में समाप्त हो रहा है. जिसके बाद वो राष्ट्रपति नहीं रहेंगे.

इस बीच एक बड़ा बदलाव ये भी हुआ है कि रूस के राष्ट्रपति ने दिमित्रि मेदवेदेव को राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद का डिप्टी चेयरमैन बनाने का फ़ैसला किया गया है. लेकिन इन सबके पीछे पुतिन की रणनीति क्या है?

रूस मामलों के विशेषज्ञ और जेएनयू में प्रोफ़ेसर राजन कुमार कहते हैं. "राष्ट्रपति पुतिन के इन फ़ैसलों को दो आधार पर देखा जा सकता है. पहला तो बेशक ये कि वो सत्ता को बचाए रखना चाहते हैं. फिलहाल रूस में सुपर प्रेसीडेंशियल सिस्टम है. जहां पर राष्ट्रपति ही सबकुछ है. वो सबसे अधिक ताक़तवर है.''

प्रोफ़ेसर राजन कुमार कहते हैं, ''किसी भी अन्य देश के मुक़ाबले में रूस का राष्ट्रपति पद अधिक ताक़तवर है. रूस का राष्ट्रपति ड्यूमा (सदन) को बर्ख़ास्त भी कर सकता है. रही बात उस प्रस्ताव की जिसके तहत बदलाव किये जा सकते हैं तो इसके तहत वो सारी शक्तियां जो अभी तक राष्ट्रपति के पास थीं वो अब कम की जा रही हैं और ड्यूमा को ताक़तवर बनाया जा रहा है.''

प्रोफ़ेसर राजन कुमार का मानना है, ''प्रधानमंत्री और डिप्टी प्रधानमंत्री की शक्तियां बढ़ाई जा रही हैं. चूंकि साल 2024 तक पुतिन का कार्यकाल ख़त्म हो जाएगा तो बहुत हद तक इस बात की संभावना है कि वो एक बार फिर प्रधानमंत्री बन जाएंगे. ऐसे में संभव है कि इसीलिए प्रधानमंत्री की शक्तियां बढाई जा रही हैं ताकि अपना कार्यकाल ख़त्म होने पर वो प्रधानमंत्री के पद पर काबिज़ हो सकें."

अगर बात इस फ़ैसले से जुड़ी दूसरी संभावना की करें तो ऐसा हो सकता है कि पुतिन साल 2024 में कार्यकाल समाप्त होने के बाद ही राजनीति से किनारा कर लें, लेकिन तब उनके लिए मुश्किल हो सकती है.

प्रोफ़ेसर राजन कुमार कहते हैं, "ऐसा हो सकता है कि शेष चार साल का समय गुज़ारने के बाद वो राजनीति से संन्यास ले लें या सक्रिय राजनीति छोड़ दें. लेकिन अगर वो ऐसा करते हैं तो हो सकता है कि उस वक़्त जो भी सत्ता में हो, उनके लिए मुश्किलें पैदा कर दे. सिस्टम में कोई ऐसा ना आ जाए जो उन्हें दंडित करने के बारे में सोचे. ऐसे में पुतिन की यह रणनीति हो सकती है कि वो कोई ऐसा उत्तराधिकारी तैयार करें जिसके रहते वो निश्चिंत रह सकें. ऐसे में जो संशोधन या बदलाव सामने आ रहे हैं, उसमें इस बात की पूरी संभावना नज़र आती है."

रूस के राष्ट्रपति पुतिन पर कई राजनीति हत्याओं और भ्रष्टाचार के आरोप लगते रहे हैं. ऐसे में पुतिन अपने लिए किसी ऐसे उत्तराधिकारी को चाहेंगे जिसके होने से उन्हें दिक्कत ना हो.

जेएनयू में रशियन इंटरनेशनल स्टडीज़ में असिस्टेंट प्रोफ़ेसर अमिताभ सिंह कहते हैं, "रूस में साल 2021 में संसदीय चुनाव होने वाले हैं और साल 2024 में पुतिन का कार्यकाल ख़त्म होने वाला है. इसके बाद पुतिन शायद प्रधानमंत्री पद पर नहीं आना चाहेंगे. ऐसे में वो एक ऐसी व्यवस्था अभी से सुनिश्चित करना चाहते हैं जिसमें चेक एंड बैलेंस हो और संसद को ज़्यादा ताक़त हो. इसके अलावा एक नए स्टेट काउंसिल को भी संवैधानिक अधिकार देने की बात की जा रही है. माना ये जा रहा है कि अगर पुतिन प्रधानमंत्री नहीं बनते हैं तो वो स्टेट काउंसिल के अध्यक्ष बन सकते हैं और वहीं से वो अपनी ताकत दिखाएंगे."

क्या रूस में पुतिन को चुनौती देने वाला कोई नहीं है. इस सवाल पर प्रोफेसर राजन कुमार कहते हैं कि ऐसा बिल्कुल भी नहीं है और रूस को चीन नहीं समझा जाना चाहिए.

वो कहते हैं, "रूस में कई पार्टियां हैं. पुतिन के समर्थन वाली यूनाइटेड रशियन पार्टी के अलावा कम्युनिस्ट पार्टी एक प्रमुख पार्टी है. अगर उनका वोट बैंक या समर्थन देखें तो उनके पास भी 12-13 प्रतिशत का वोट बैंक है. इसके अलावा भी कई पार्टियां हैं. लेकिन फिलहाल वहां की राजनीति में यूनाइटेड रशियन पार्टी की स्थिति वही है जो भारत में इंदिरा गांधी के समय में कांग्रेस की थी."

प्रोफेसर राजन कुमार के मुताबिक, "आसान शब्दों में कहें तो माना जा सकता है कि रूस में फिलहाल वन पार्टी सिस्टम है. कम्युनिस्ट पार्टी अहम है, लेकिन वो ज़्यादातर मसलों पर पुतिन का समर्थन ही करती है. इसके अलावा एक बड़ी वजह ये भी है कि कम्युनिस्ट पार्टी के नेता काफी उम्रदराज़ हैं और ऐसे में वो रूस के युवाओं के बीच उतने लोकप्रिय नहीं हैं."

प्रोफेसर राजन कुमार मानते हैं कि रूस का एक बड़ा मुद्दा सुरक्षा है. यूक्रेन के मुद्दे को लेकर अमरीका के साथ गतिरोध और इसके अलावा कई मुद्दे हैं. ऐसे में वहां के लोग चाहते हैं कि उनका नेता कोई ऐसा हो जो पश्चिमी देशों के हाथों की कठपुतली ना हो. एक वक़्त ऐसा भी था जब रूस के लिए कहा जाता था कि यह एक 'बड़ा पेट्रोल पंप' है और कुछ नहीं. पुतिन ने रूस की स्थिति को मज़बूत बनाया है, ऐसे में उनकी लोकप्रियता से इनक़ार नहीं किया जा सकता.

अमिताभ सिंह भी यही मत रखते हैं. उनका कहना है, "रूस में राष्ट्रपति ही सर्वेसर्वा है. रूस के राष्ट्रपति को जितनी पावर है वो दुनिया में किसी भी दूसरे राष्ट्रपति को नहीं है. उन पर कोई उंगली उठाने वाला नहीं है. वहां जो विपक्ष है, वो भी 'इंस्टीट्यूशनल अपोज़िशन' है. वो कभी भी खुलकर पुतिन का विरोध नहीं करता है और जो लोग विरोध करने की स्थिति में होते हैं, उनके लिए सरकार वो जगह ही नहीं बनने देती. उनकी शक्ति को चुनौती देने वाला कोई नहीं है."

जानकार मानते हैं कि भारत और रूस के बीच द्विपक्षीय संबंध बेहद मज़बूत हैं. अमिताभ सिंह कहते हैं कि सामरिक दृष्टि से देखें तो भारत और रूस एक दूसरे पर निर्भर हैं. भारत, रूस से हथियार ख़रीदता है.

बीस साल पहले व्लादिमीर पुतिन को सत्ता की चाबी थाली में सजाकर पेश की गई थी.

पूर्व राष्ट्रपति बोरिस येल्तसिन और उनके निकटतम सहयोगियों ने देश को इक्कीसवीं सदी में ले जाने के लिए रूसी ख़ुफ़िया एजेंसी केजीबी के पूर्व अधिकारियों को ख़ुद चुना था. उन्हीं में से एक थे व्लादिमीर पुतिन.

व्लादिमीर पुतिन के रूस के राष्ट्रपति बनने में बेहद अहम भूमिका निभाई थी वेलेन्टिन युमाशेव ने. युमाशेव पूर्व पत्रकार हैं और बाद में वो रूसी सरकार में अधिकारी बने. युमाशेव, बोरिस येल्तसिन के सबसे भरोसेमंद सहयोगियों में से एक थे.

येल्तसिन ने एक इंटरव्यू में कहा था कि उस वक़्त कहीं से भी ये विचार नहीं आया था कि ये व्यक्ति आगे चल कर देश का राष्ट्रपति बन सकता है.

Wednesday, December 11, 2019

谷歌帝国的最新掌门人桑达·皮采的履历和最新职责

谷歌掌门人桑达·皮采(Sundar Pichai)又升迁了,这次是兼任谷歌母公司Alphabet的首席执行官。

谷歌联合创办人布林和佩奇宣布退居二线,而谷歌王国的大权全部交给第三把手,印裔美籍“70后”皮采。

从印度钦奈的清贫之家,到谷歌帝国掌门人的办公室,皮采47年的人生故事被称为“美国梦”的实例和印度在国际科技界的地位的明证。

他主政期间谷歌推出了不少重磅产品,也曾因中国市场战略和其他问题招惹非议。

1972年,皮采出生在印度海滨城市钦奈(Chennai,原名马德拉斯)一个普通家庭,家境较窘迫。他和父母、弟弟一家4口挤在一套只有两间房间的公寓,兄弟俩晚上在客厅打地铺。

家里没有电视,没有汽车。皮采12岁时家里才装了电话。

很多年后,皮采已成为印度人民的骄傲的时候,印度媒体披露说,他从小就懂得节俭、勤奋,学习很刻苦。

皮采在中学是学霸,但不是书呆子 — 他是学校板球队队长,率领队友们一路过关斩将,夺得地区大赛冠军。

他父亲是当地英国通用电器公司的工程师,当年每天下班回家后会跟儿子聊公司的事,包括遇到的苦难。他记得桑达记忆特别好,尤其擅长记电话号码。

后来,皮采毫无悬念地进了印度理工学院卡拉格普尔分校(IIT Kharagpur),学习冶金工程专业。

这个学校是印度政府组建的工程技术高等学府,有七个分校在全国各地,被称为印度“科学皇冠上的瑰宝”,是印度最顶尖的工程教育与研究机构。这个学校的IT毕业生遍布世界各地,很多人汇聚在美国硅谷。

《印度时报》引述皮采上大学时的一位老师说,这孩子是那一届最聪颖最出色的一个。

印度网站Bollywoodshaadis.com在讲皮采夫妇罗曼史的时候直呼他俩证明,真正的爱情经得起时间和现实的考验。

皮采曾对媒体说过当年在学校跟女友约会很不方便,因为没有手机。

“到女生宿舍楼去找她,得从正门进去,在前厅等人进去把她叫出来。通常那些人会高声喊,安嘉莉,桑达来啦!那可不是什么令人愉快的经历。”

大学毕业后,皮采拿到美国斯坦福大学的奖学金。飞美国的机票价钱超过了父亲一年的工资。

最后全家设法把他送到了美国。他那时口袋空瘪,穷学生一枚。而女友安嘉莉则留在印度,两人相隔万里,曾经6个月没有通过话,但相思不断。

后来安嘉莉也去了美国,这才结束了两地相思之苦。

采在一家半导体公司找到了工作,有了稳定收入,觉得可以成家了。在征得姑娘父母同意之后,他向安嘉莉求婚,姑娘一口答应。

印度媒体还声称要不是妻子,皮采可能早就被其他公司挖走了,也就没有今日谷歌和Alphabet掌门人的故事了。微软曾经想招皮采去当CEO,推特和雅虎也都找过他,但安嘉莉说,别心神不定,就留在谷歌。

皮采2004年加入谷歌。他的技术天才在那里显然得到了发挥。

他参与、负责研发的重磅产品包括谷歌浏览器Chrome,还有安卓手机操作系统。

安卓是目前世界上用户最多的手机操作系统。

在同事眼里,皮采性格温和,人缘很好,为人处世比较周全,软件开发员尤其喜欢他。

到最新任命为止,他的履历表上最主要的职责描述都是围绕谷歌的核心业务,包括搜索引擎、浏览器等等。

新产品开发,有些成功,有些失败;市场推广,有的地方成功,有的地方麻烦;与世界各地政府的关系,有好有坏。